(वैज्ञानिक, अप्रैल-सितंबर, 2005, वर्ष 37, अंक2/3 में प्रकाशित)
सभी ऊर्जाओं में परम है परमाणु ऊर्जा।
सर्वत्र होती है, जिसकी सर्वाधिक चर्चा ।।
हिरोशिमा-नागासाकी पर, टूटा बन कर कहर।
अंकुश लगाया सभी राष्ट्रों ने संयुक्त हो कर।.
उदय हुआ परमाणु ऊर्जा का उज्ज्वल प्रहर।
भारत ने दिखाई जब शांति से भरी डगर।।
तीन चरणों पर है परमाणु ऊर्जा अग्रसर।
प्रगति की राह में, चला है सुहाना सफर।।
पहले चरण का नाभिकीय ईंधन था यूरेनियम।
दूसरे में साथ देता मानव-निर्मित प्लूटोनियम।।
अपनी बारी की प्रतीक्षा में तैयार खड़ा थोरियम।
निखरता ही जा रहा है, परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम।।
जलती है आज घर-घर परमाणु बिजली।
जगमग में इसकी रोशन होती दिवाली।।
प्रकृति के साहचर्य में भी मानव करता ग्रहण।
रोगियों की जीवन रेखा बन गई विकिरण।।
अन्न-जल होते चिरंजीवी, कर उपयोग।
पा कर सहारा काया हो जाती निरोग।।
अथक परिश्रम से, जुटे साराभाई काकोडकर।
तब जा कर भाभा का स्वप्न हुआ है साकार।।
– डॉ.रश्मि वार्ष्णेय